ईद की नमाज़ की सुन्नतें और मुस्तहब अमल – साल भर में एक या दो बार जो सुन्नतों पर अमल करने का मौका मिलता है तो उसपर जरूर अमल करें।
ईद की नमाज़ से पहले के सुन्नत और मुस्तहब अमल:
1. ग़ुस्ल करना – ईद की नमाज़ से पहले नहाना सुन्नत है।
2. मिस्वाक करना – दाँत साफ़ करने के लिए मिस्वाक या ब्रश करना अच्छा अमल है।
3. अच्छे और साफ़ कपड़े पहनना – मुमकिन हो तो नए कपड़े पहनें, वरना साफ़ और अच्छे कपड़े पहनें।
4. इत्र लगाना – खुशबू लगाना सुन्नत है।
5. सदक़-ए-फ़ित्र अदा करना – ईद की नमाज़ से पहले ग़रीबों को सदक़ा-ए-फ़ित्र देना वाजिब है। अगर सदक़-ए-फ़ित्र अदा करना बाकी है तो ईद की नमाज से पहले अदा करें।
6. खजूर खाना – ईद-उल-फ़ितर की नमाज़ से पहले ताक़ (1, 3, 5) संख्या में खजूर खाना सुन्नत है।
7. तकबीर पढ़ना – ईद-उल-फ़ितर के लिए नमाज़ को जाते वक़्त तकबीर पढ़ना मुस्तहब है।
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाहु, वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, व लिल्लाहिल-हम्द।
तर्जुमा:
“अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। और अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है, और सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं।”
ईद की नमाज़ की सुन्नतें:
1. ईदगाह जाना – अगर मुमकिन हो तो ईद की नमाज़ मस्जिद की बजाय ईदगाह में पढ़ना अफजल है। ईदगाह अगर न हो तो शहर की बड़ी जामा मस्जिद जहां पर ज्यादा तादाद में लोग जमा हों वहां अदा करने की कोशिश करें।
2. पैदल जाना – अगर हो सके तो ईदगाह पैदल जाएं और वापसी में दूसरा रास्ता अपनाएं।
3. बिना अज़ान और इक़ामत के नमाज़ पढ़ना – ईद की नमाज़ के लिए ना अज़ान दी जाती है, ना इक़ामत।
4. छह ज़ायद तकबीरें कहना – ईद की नमाज़ में पहली रकात में तीन और दूसरी रकात में तीन ज़ायद तकबीरें होती हैं।
5. ख़ुतबा सुनना – नमाज़ के बाद ख़ुतबा सुनना सुन्नत है और इसे ध्यान से सुनना चाहिए। असल खुत्बा (तकरीर) ईद की नमाज के बाद ही है।
ईद की नमाज़ के बाद के मुस्तहब अमल:
1. आपस में मुबारकबाद देना – “ईद मुबारक” कहना या “तक़ब्बलल्लाहु मिन्ना व मिनकुम” (अल्लाह तुम्हारी और हमारी इबादतें क़ुबूल करे) कहना अच्छा अमल है।
2. ख़ुशी और शुक़्र अदा करना – अल्लाह का शुक्र अदा करना और ख़ुशी मनाना मुस्तहब है।
3. ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का ख़याल रखना – ईद के दिन ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को खाना खिलाना और उनकी मदद करना बेहतर अमल है।
यह सुन्नतें और मुस्तहब अमल अपनाकर ईद की बरकतों को बढ़ाया जा सकता है।