ईद के दिन सब ख़ुश रहते हैं। लेकिन बच्चों की ख़ुशी का क्या कहना!

ईद के दिन सब ख़ुश रहते हैं। लेकिन बच्चों की ख़ुशी का क्या कहना!

माहे रमजान शरीफ के रोजे मुकम्मल होने के बाद शव्वाल महीने का पहला दिन होता है ईद का दिन। जो खुशियों का, आपस में प्यार बांटने का, जरूरतमंदो की मदद करने का दिन है। लेकिन इस दिन खास कर के सब से ज्यादा खुशी होती है बच्चों को। सब से पहले तो नए नए कपड़े पहन कर दोस्तों के साथ घूमना, अपनी पसन्द की चीज़ें ख़रीदना और ख़ूब मौज-मस्ती करना अच्छा लगता है। इन सब कामों के लिए पैसों की ज़रूरत होती है और ईद के दिन पैसों की कोई कमी होती नहीं है। ईद के दिन ईदी जो मिलती है। हर बड़ा अपने से छोटे को अपनी हैसियत के हिसाब से कुछ रुपए देता है, इसी रक़म को ईदी कहते हैं छोटे बड़ों के सामने जाते हैं, सलाम करते हैं और ईद मुबारक कहते हैं, बस! हो गई ईदी पक्की। कुछ बच्चे यहाँ ज़िद भी कर लेते हैं और अपनी मुँह माँगी रक़म हासिल कर लेते हैं।

लेकिन बहुत से परिवार ऐसे भी हैं जिनके वहां के बच्चे इन खुशियों से महरूम रह जाते हैं। पैगामे सैयद चेरिटेबल ट्रस्ट के खास खिदमत गुजार जनाब हनीफ भाई, समीर भाई, शानू बापू और टीम ने खास ऐसे बच्चों की खुशी के लिए पिछले 3 साल से एक अजीम काम शुरू किया है। जिसमे ऐसे परिवार के बच्चों को उनकी पसंद के कपड़े दिलाए जाते हैं। यकीन मानो उन छोटे बच्चों के चेहरे पर जो खुशियां झलकती है आप को दिल में इतना सुकून महसूस होगा की सही जगह हमने रकम अदा की है। हम बड़ों की ईद इनके मुस्कुराते हुए चेहरों से ही संवर जाती है। इस काम को हम हर साल बढ़ाते हैं। क्या आप भी ऐसे नेक कामों में शामिल होना चाहते हो ???

इस साल बच्चों के लिए कपड़े जो दिए गए उसकी तस्वीरें।

चेहरे की खुशी तस्वीर में नहीं बता सकते, अगर आपको वो देखनी हो या महसूस करनी हो तो इस अजीम काम में जुड़ सकते हैं। अपनी हलाल कमाई से माली इमदाद कर के या हमारी टीम से राबता कर के

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